Tuesday, December 22, 2015

आज वह भी खफा है!

गहराई की भी उंचाई देखता हूँ,
लू में भी ठंढाई पाता हूँ,
अकेलेपन में भी भीड़ लगती है,
जब - वह मेरे संग होती है.

रूठों को मनाने की छमता रखता हूँ,
हर गुथी को सुलझाने की कोशिश करता हूँ,
विश्व तक को बेहतर बनाने की शक्ति है,
जब - वह मेरेसंग होती है.

दूर रह कर भी वह मेरेसंग है,
कोई गम नहीं , हर पल उमंग है,
बिन तपस्या भी मेरा मन उसके संग है,
प्रेम का यही  तो ढंग है.

पर आज वह मुझसेखफा है,
आज कु छ ज्यादा ही खफा है,
खफा होना आसान नहीं,
खुद को सजा देना आसान नहीं,
- पर आज वह मुझसे खफा है.

ऐसा लगता है- आवाज़ें बंद हो गयीं,
भीड़ अचानक कम हो गयी,
मेरी दिशा कहीं लुप्त हो गयी,
कल की आस भी कम हो गयी.

मना तो मैं लूँगा - मान तो वह जायेगी,
पर - कु छ बेहतरीन पल ज़िन्दगी में से छंट गए,
पर उसकी अहमियत फिर जता गए,
 उस पर कितना बोझ है,
मेरी पूरी दुनिया का एक वही बोध है.

पर आज मेरी दुनिया खफा है,
क्यूंकि आज वह खफा है.

Hyderabad, March 2010

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